Thursday, January 17, 2013
Saturday, January 12, 2013
अपनो की विदाई पर कुछ पन्क्तियां
आप के होने खुशी इस कदर महकी
कि थम गये ओ पल जब कोई बात थी
भुल नही सकते आपकी ओ हसी की मह्फिले
आपके साथ जब फूलो की बरसात थी
आपके जाने का गम तो इस कदर सताएगा
कि हर पल एक यूग नजर आएगा
कर लेंगे इन्तजाम इनसे जूझ लेने
आपकी यादो के सहारे इन्तजाम हो जाएगा
दिन गुजरे बस्तिया पसरी आपके साथ जो सुकून मिले
बहारो को भी तरस आये आपके कदमो मे ओ फूल मिले
जमाने भर की जुदाई छोड जा रहे है, न जाने कब मिलन होगा
उम्मीद है जब हम मिले, खुशियो भरा जीवन होगा
कि थम गये ओ पल जब कोई बात थी
भुल नही सकते आपकी ओ हसी की मह्फिले
आपके साथ जब फूलो की बरसात थी
आपके जाने का गम तो इस कदर सताएगा
कि हर पल एक यूग नजर आएगा
कर लेंगे इन्तजाम इनसे जूझ लेने
आपकी यादो के सहारे इन्तजाम हो जाएगा
दिन गुजरे बस्तिया पसरी आपके साथ जो सुकून मिले
बहारो को भी तरस आये आपके कदमो मे ओ फूल मिले
जमाने भर की जुदाई छोड जा रहे है, न जाने कब मिलन होगा
उम्मीद है जब हम मिले, खुशियो भरा जीवन होगा
अपनो की विदाई पर कुछ पन्क्तियां
आप के होने खुशी इस कदर महकी
कि थम गये ओ पल जब कोई बात थी
भुल नही सकते आपकी ओ हसी की मह्फिले
आपके साथ जब फूलो की बरसात थी
आपके जाने का गम तो इस कदर सताएगा
कि हर पल एक यूग नजर आएगा
कर लेंगे इन्तजाम इनसे जूझ लेने
आपकी यादो के सहारे इन्तजाम हो जाएगा
दिन गुजरे बस्तिया पसरी आपके साथ जो सुकून मिले
बहारो को भी तरस आये आपके कदमो मे ओ फूल मिले
जमाने भर की जुदाई छोड जा रहे है, न जाने कब मिलन होगा
उम्मीद है जब हम मिले, खुशियो भरा जीवन होगा
कि थम गये ओ पल जब कोई बात थी
भुल नही सकते आपकी ओ हसी की मह्फिले
आपके साथ जब फूलो की बरसात थी
आपके जाने का गम तो इस कदर सताएगा
कि हर पल एक यूग नजर आएगा
कर लेंगे इन्तजाम इनसे जूझ लेने
आपकी यादो के सहारे इन्तजाम हो जाएगा
दिन गुजरे बस्तिया पसरी आपके साथ जो सुकून मिले
बहारो को भी तरस आये आपके कदमो मे ओ फूल मिले
जमाने भर की जुदाई छोड जा रहे है, न जाने कब मिलन होगा
उम्मीद है जब हम मिले, खुशियो भरा जीवन होगा
Tuesday, January 8, 2013
Nehru aur Edwina
14 नवंबर को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन है। भारत आज जिस मुकाम पर है उसका बहुत बड़ा श्रेय उनको जाता है। dainikbhaskar.com इस मौके पर एक विशेष सीरीज के तहत बताने जा रहा है नेहरूजी से जुड़ी कुछ कही अनकही बातें।
नई दिल्ली।पंडित जवाहर लाल नेहरू के बारे में कई तरह की बातें कहीं जाती हैं। उनमें सबसे ज्यादा जिस पर चर्चा होती है वह नाम हैं हिंदुस्तान के अंतिम वाइसराय माउंटबेटन की पत्नी एडविना के बारे में। इसमें कोई शक नहीं कि नेहरू और लेडी एडविना माउंटबेटन के बीच काफी आत्मीय रिश्ते थे। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। आज भी इस रिश्ते को लेकर इस बात पर बड़ा भ्रम है कि इन रिश्तों को कहां तक आगे ले जाकर देखा जाए।
भारत की आजादी से पहले माउंटबेटन से नेहरूजी की लगातार देर तक होने वाली मुलाकातों के चलते उनकी माउंटबेटन की पत्नी एडविना से भी आत्मीयता हो गई,जो भारत की आजादी के बाद भी तब तक कायम रही जब तक नेहरूजी जिंदा थे। नेहरूजी एडविना को हमेशा पत्र लिखते रहे। ब्रिटेन में वह एडविना से मिलते रहे। एडविना भी सालभर में एक बार भारत जरूर आती थीं। उनको दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में सरकारी मेहमान के रूप में ठहराया जाता था। माउंटबेटन और एडविना की बेटी पामेला माउंटबेटन ने स्वीकार किया है कि नेहरू और उनकी मां एक-दूसरे को पसंद करते थे। कुछ साल पहले पामेला ने भारतीय पत्रकारों के सामने स्वीकार करते हुए कहा–दे आर इन लव-(यानी वे प्यार करते थे)वे आगे कहती हैं-उनके बीच भावनाओं और गहरे प्यार को समझना लोगों के लिए मुश्किल होगा। दोनों काफी एकाकी थे। नेहरू की पत्नी का निधन हो गया था। माउंटबेटन काफी व्यस्त रहते थे। एडविना इंट्रोवर्ट चरित्र की महिला थीं। उनका लोगों से संवाद ज्यादा नहीं था,लेकिन उनमें और नेहरू में जब बात होने लगी तो यह हैरानी की बात थी। भारत छोड़ने के बाद भी ये दोनों सालभर में एक दो बार मिल लेते थे। ये बात माउंटबेटन को पता थीं।
क्या लिखा है नेहरूजी के सचिव ने अपनी किताब में
नेहरूजी के सचिव केएफ रुस्तम की डायरी के संपादित अंश किताब के रूप में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने एडविना और नेहरू के बीच के प्यार के बारे में लिखा है कि दोनों अभिजात्य वर्ग के थे। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे। नेहरूजी के अन्य महिलाओं के प्रति अनुराग को लेकर काफी कुछ लिखा गया है। नेहरूजी के सचिव रुस्तम लिखते हैं कि उन्हें महिलाओं का साथ यकीनन भाता था। ये महिलाएं प्रखर बुद्धि और प्रतिभावान होती थीं। सरोजनी नायडू की बेटी पद्मजा उनके करीब थीं। वे नेहरूजी के काफी करीब थीं और उनका काफी ख़्याल रखती थीं। इंडियन समर–द सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ द एंड आफ एन एम्पायर किताब के लेखक अलेक्स वॉन टेजमन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा,एक बार पद्मजा ने गुस्से में एडविना की फोटो फेंक दी। हालांकि बाद में दोनों अच्छी दोस्त बन गईं। टेजमन के अनुसार,नेहरू को होशियार महिलाएं पसंद थीं।
श्रद्धा माता और मृणालिनी साराभाई
रुस्तम की डायरी में देश की प्रसिद्ध नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई का भी जिक्र हैं। बाद में वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की पत्नी बनीं। वह भी उनके काफी करीब रहीं। नेहरू के बाद में सचिव बने एमओ मथाई ने नेहरू के जीवन में बनारस की किसी महिला का जिक्र किया है,शायद वह श्रद्धा माता थीं। मथाई का कहना है कि वह किसी प्लेब्वॉय की तरह थे। जब मथाई ने किताब रिमिनिसेंस लिखी तो उसमें एक अध्याय नेहरू के जीवन में आई महिलाओं पर था। बाद में इसे प्रकाशन से पहले हटा लिया गया। श्रद्धा माता का जिक्र बाद में देश के वरिष्ठ लेखक खुशवंत सिंह ने भी अपनी किताब में किया है। वे जब मिले तो श्रद्धा माता ने उनसे नेहरू के करीबी होने का दावा किया। श्रद्धा माता के पास नेहरूजी के लिखे गए कुछ पत्र भी थे। नेहरूजी के बारे में इस तरह की बातें हमेशा चर्चा में रहती हैं। उनके करीबी या साथ में काम करने वालों ने जो किताब लिखी उसमें उनके महिला प्रेम का संकेत जरूर किया है।
(स्रोत-अहा!जिंदगी,नवंबर 2015 के अंक में छपे दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव के लेख का एक भाग)
संविधान और आंबेडकर
26 नवंबर
संविधान दिन
भारतीय संविधान और डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर
1) संविधान सभा में जाने के लिए बाबासाहब अंबेडकर जी ने जोगेन्द्रनाथ मंडल इनके सहायता से 17 जुलै 1946 को पुर्व बंगाल के जैसल-खुलना इस चुनाव क्षेत्र से चुनाव के लिए खड़े हुए। बाबासाहब अंबेडकर 20 जुलै 1946 को वहाँ से चुनकर आएं।
2) संविधान सभा की पहली मिटिंग 9 दिसम्बर 1946 (सोमवार) को संविधान सभागृह दिल्ली यहाँ 11 बजे शुरू हुईं।
3) संविधान सभा में बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपना पहला भाषण 17 दिसम्बर 1946 को दिया। (10 मिनट का अवधि)
4) बाबासाहब अंबेडकर जी जिस चुनाव क्षेत्र से संविधान सभा गए थे वे हिस्सा पाकिस्तान में शामिल किया जानेवाला था यानी बाबासाहब अंबेडकर जी पाकिस्तान के संविधान सभा में जा सकते थे। किन्तु बाबासाहब अंबेडकर जी ने काँग्रेस की यह साजिश अंग्रेजो को बताई। तब अंग्रेजो ने काँग्रेस को धमकाया की बाबासाहब अंबेडकर को संविधान सभा में नहीं लिया गया तो हम भारत को आजादी नहीं देंगे और अंग्रेजो ने काँग्रेस के सामने दो शर्तें रखी। 1) जैसल-खुलसा प्रदेश को दोबारा भारत में सामिल किया जाए। 2) किसी भी सदस्य का ईस्तिफा लेकर बाबासाहब अंबेडकर जी को संविधान सभा में लिया जाए।
(काँग्रेस ने जैसल-खुलसा प्रदेश भारत में सामिल नही किया बल्कि संविधान सभा के अध्यक्ष डाॅ.राजेन्द्र प्रसाद इन्होंने मुंबई के पुर्व मुख्यमंत्री बी.जी.खेर इन्हें 30 जून 1947 को खत भेजकर बाबासाहब को संविधान सभा में दोबारा लाओ ऐसा कहाँ था। बाद में काँग्रेस ने पुना के बॅरि.जयकर जो मुंबई से संविधान सभा में चुनकर गए थे उन्हें अपना ईस्तिफा देने को कहाँ और बाबासाहब अंबेडकर जी को मजबूरन संविधान सभा में लिया गया।)
5) बाबासाहब अंबेडकर जी को जुलै 1947 को दोबारा संविधान सभा पर चुना गया।
6) पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को बाबासाहब अंबेडकर जी को अपने मंत्रिमंडल में शामिल होने हेतु न्योता भेजा। बाबासाहब अंबेडकर जी ने वो न्योता स्विकारा और वे भारत के पहले कानून मंत्री बने।
7) 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने एकमत से बाबासाहब अंबेडकर जी को मसौदा समिती का अध्यक्ष बनाया।
8) मसौदा समिती की मिटिंग 27 अक्तूबर 1947 के बाद हर रोज होती थी। मसौदा समिती में 7 सदस्य थे।
9) समिती की मिटिंग 13 फरवरी 1948 तक कुल 44 दिन हुईं।
10) मसौदा समिती ने संविधान का पहला मसौदा 21फरवरी 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष के सामने पेश किया।
11) यह मसौदा 8 महिनों के लिए लोगों के चर्चा के लिए उपलब्ध (Available) करवाया गया। The Gazette of India (26 February 1948) में प्रकाशित
12) यह मसौदा 4 नवम्बर 1948 को संविधान सभा में पेश किया गया। भारत की संविधान सभा संविधान सभागृह नई दिल्ली में हुई थी।
13) 4 नवम्बर 1948 को यह मसौदा पेश करने के बाद उसपर चर्चाएँ शुरू हुई। इस चर्चा को फर्स्ट रिडिंग कहाँ गया।
14) संविधान के सेकेंड रिडिंग की शुरूवात 15 नवम्बर 1948 को हुई। यह चर्चा 17 अक्तूबर 1949 को समाप्त हुईं।
15) उसके बाद उसकी थर्ड रिडिंग 14 नवम्बर 1949 को शुरू हुई और यह सत्र 26 नवम्बर 1949 को खत्म हुआ। उसके बाद यह संविधान स्विकारा गया और उसपर संविधान सभा के अध्यक्ष ने हस्ताक्षर किए।
नवम्बर 1949 को संविधान का कामकाज खत्म हुआ तब संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 324 थी।
** संविधान सभा के सदस्यों में प्रसिद्ध वकील, चिकित्सक, शिक्षाविद्, उपकुलपती, उद्योगपति तथा व्यापारी, श्रमिकों के प्रतिनिधि, लेखक और पत्रकार आदि सभी थे।
*** संविधान सभा की पहली बैठक में 207 सदस्यों ने भाग लिया था और बिहार के वयोवृद्ध नेता डाॅ.सचिदानंद सिन्हा अस्थायी सभापति बने।
*** 11 दिसम्बर 1946 को डाॅ.राजेन्द्रप्रसाद को सर्व सम्मति से सभा का स्थायी सभापति चुन लिया गया और अन्त तक वे ही संविधान सभा के सभापति बने रहे।
*** भारत का संविधान तयार करने के लिए 2 साल 11 महिने 17 दिन लगे।
*** इस दरमियान संविधान सभा के कुल 11 अधिवेशन और 165 मिटिंग हुई।
*** संविधान सभा का तीन वर्ष में जो व्यय हुआ वह अधिक न था। 22 नवम्बर 1949 तक 63, 96, 729 रूपये व्यय किए गए।
*** प्रारूप समिति ने संविधान सभा के सम्मुख जो पहला प्रारूप संविधान प्रस्तुत किया उसमें 315 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ थी।
*** अन्तिम रूप में संविधान में 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ थी।
*** प्रारूप संविधान में संशोधन के 7635 प्रस्ताव रखे गए। इनमें से सदन में कुल 2473 संशोधन प्रस्तुत किए गए।
*** संविधान सभा में 10 से ज्यादा महिलाएँ थी। संविधान सभा में श्रीमती सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृता कौर यह महिलाओं की प्रतिनिधित्व करती थी।
*** तयार संविधान पर हस्ताक्षर करने के लिए 24 जनवरी 1950 को संविधान की तीन प्रतियाँ सभा के पटल पर रख दी। एक अंग्रेज़ी प्रती हस्तलिखित और चित्रकारों के कलाकृतीयों द्वारा तयार थी। एक अंग्रेज़ी प्रती छपी हुई थी और एक प्रती हिन्दी में हस्तलिखित थी। सभा के अध्यक्ष ने सभी सदस्यों को इन तीनों प्रतीयों पर हस्ताक्षर करने की बिनती की और सभी सदस्यों ने उसपर हस्ताक्षर किए। 26 जनवरी 1950 से भारतीय संविधान का अंमल करना शुरू हुआ।
*** संविधान सभा के अध्यक्ष डाॅ.राजेन्द्र प्रसाद इनकी बाबासाहेब के बारे में राय,
" संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष डाॅ. अंबेडकर ने अपनी सेहत की परवाह न करके यह कार्य (संविधान लिखने का काम) समर्थता से पूरा किया। संविधान तयार करने के लिए चुनी गई लेखा-समिति पर डाॅ.अंबेडकर को चुनकर समिति (सभा पर) के अध्यक्ष पद पर चुनने का संविधान सभा ने जो निर्णय लिया इतना अचूक निर्णय इससे पहले संविधान सभा ने कभी भी नहीं लिया और डाॅ.अंबेडकर ने भी अपने चुनाव की यथार्थता को सिद्ध किया इतना ही नहीं, उन्होंने जो कार्य किया उसे उन्होंने एक तरह की तेजस्विता दी।"
- डाॅ.राजेन्द्र प्रसाद (संविधान सभा के अध्यक्ष और भारत के पहले राष्ट्रपति)
*** Shri T.T.Krishnamachari, a colleague of his in the Drafting Committee, said in one of his speeches in the Constituent Assembly :
" The House is perhaps aware that of the seven members nominated by you, one had resigned from the House and was replaced. One was away in America and his place was not filled up, and another person was engaged in State affairs, and there was a void to that extent. One or two people were far away from Delhi and perhaps reason of health did not permit them to attend. So it happend ultimately that the burden drafting this Constitution fell upon Dr.Ambedkar and I have no doubt that we are grateful to him for having achieved this task in a manner which is undoubtedly commendable. "
संविधान दिन की सभी को शुभकामनाये...
आओ इस संविधान दिन पे हम यह सपथ ले की संविधान में दिए हुवे हमारे हक़ और अधिकार के साथ साथ हम अपनी दी हुई फर्ज भी निभाएँगे।
जय भीम
जय भारत
जय संविधान
बाबा साहब की साहित्य
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*Sl. No./* *Name/* *Rates*
*1. भारत का संविधान ₹250*
*2. भगवान बुद्ध और उनका धम्म ₹150*
*3. पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन₹250*
*4. हिंदू धर्म की रीडल ₹200*
*5. कांग्रेस व गांधी ने अछुतो के लिए क्या किया ₹200*
*6. शूद्रो की खोज ₹150*
*7. बौद्ध धर्म और साम्यवाद ₹80*
*8. गांधी और अछुतो की विमुविक्ति ₹60*
*9. राज्य और अल्पसंख्यक ₹50*
*10. जातिभेद का बीजनाश ₹60*
*11. संघ बनाम स्वतन्त्रता ₹50*
*12. गांधी व गांधीवाद ₹35*
*13. भगवान बुद्ध ने क्या शिक्षा दी* ₹50
*14. डा. आंबेडकर की साक्षी ₹30*
*15. सम्मान के लिए धर्म परिवर्तन करें ₹40*
*16. बुद्ध और कार्ल मार्क्स ₹35*
*17. वीसा की प्रतीक्षा में ₹30*
*18. धमचक्र पर्वत्तन सुत्त ₹30*
*19. हिंदू नारी का उत्थान और पतन ₹60*
*20. रानडे, गांधी और जिंना ₹40*
*21. ईश्वर, आत्मा, वेदादि में विश्वास अधर्म है ₹30*
*22. हम बौद्ध क्यो बने ₹20*
*23. द रिडलस आफ रामा एण्ड कृष्णा ₹30*
*24. भारत में जातिया ₹30*
*25. अछूतपन का मूल ₹15*
*26. 15000 बच्चों के बौद्ध नाम ₹40*
*27. ओ बी सी साहित्य के विविध आयाम ₹80*
*28. पांचाल राजवंश का प्राचीन इतिहास ₹225*
*29. मनुस्मृति जलाई गई कयो ₹40*
*30. गुलामगिरी ₹60*
*31. शम्भुक् बध ₹30*
*32. ब्राह्मण वाद से हर कदम लड़ो ₹125*
*33. सृस्टि के विकास का वैज्ञानिक सत्य ₹150*
*34. चमचा युग ₹60*
*35. चीनी बौद्ध धम्म का इतीहास ₹200*
*36. नालंदा का पुरात्तवीक वैभव ₹200*
*37. पूना पैकट ₹100*
*38. डा. आबेडकर का अंतिम संदेश ₹30*
*39. चंद्रगुप्त मौर्य महाकाव्य ₹300*
*40. प्राचीन बौद्ध नगरी कौशम्बी ₹100*
*41. हिंदू जाति का उत्थान और पतन ₹150*
*42. सिंधू घाटी की सभ्यता और सृजन करता ₹200*
*43. आरक्षण जरुरी क्यो ₹40*
*44. चमार जाती का गौरवशाली ईतीहास ₹200*
*45. क्या बालू की भीत पर खड़ा है हिन्दू धर्म ₹300*
*46. ज्योतिबा फुले जीवनी ₹125*
*47. अनुवांशिक शोध और विदेशी आर्य ब्राह्मण ₹60*
*48. पेरियार जीवन दर्षन ₹150*
*49. आर्य नीति का भंडाफोड़ ₹40*
*50. क्या डा. अम्बेडकर की हत्या हुई ₹35*
*51. महिसासुर ₹30*
*52. मनुस्मृति ₹200*
*53. धोबी समाज का ईतिहास ₹150*
*54. पासी समाज दर्पण ₹150*
*55. 1857 में दलीतो का योगदान ₹100*
*56. अछूत कौन और कैसे ₹60*
*57. ऋग्वैदिक आर्य- राहुल सांस्कृत्यान ₹180*
*58. मौर्य सम्राट ऐतिहासिक उपन्यास ₹300*
*59. वीर पासी जाती का इतिहास और साम्राज्य ₹50*
*60. अंधविश्वासों एवम् कर्मकांडो का वैज्ञानिक विश्लेषण ₹50.*
*61. पेरियार महान ₹80*
*62. धम पद ₹150*
*63. आर्य अनार्य सघर्ष ₹55*
*64. म्रत्यु भोज क्यों ₹30*
*65. सम्राट अशोक ₹55*
*66. आर्य सत्य ₹100*
*67. इक्कीसवीं सदी की मनुस्मृति ₹290*
*68. असुर लोक नायक ₹20*
*69. युग प्रवर्तन महिलाये ₹70*
*70. भारतीय नारी मनु की मारी ₹50*
*71. मार्क्सवाद वनाम ब्राह्मणवाद ₹50*
*72. बहुजन भारत में धार्मिक डाका ₹60*
*73. चमार जाती का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान ₹80*
*74. आरक्षण मिक्षक या धोका ₹80*
*75. दलित और नवसमराज्य ₹100*
*76. दलित और राजनीती ₹ 125*
*77. प्रचाल राजवंश का प्राचीन इतिहास ₹225*
*78. मान्यवर कांसी राम जी की अंतिम सम्पादकीय ₹ 175*
*79. रामायण या सीतायन ₹250*
*80. वाल्मीकि रामायण ₹300*
*81. तथागत बुद्ध जीवनी और देशनए ₹175*
*82. बौद्ध धर्म के आधार स्तम्भ ₹70*
*83. गाडगे और उनका मिसन ₹60*
*84. गुरु रविदास जी की हत्या के प्रमाण ₹60*
*85. नारायण गुरु सचित्र जीवनी ₹60*
*86. रामायण में आदिवासियों के लिए एक षड्यंत्र ₹200*
*87. हिन्दू कोड बिल और अम्बेडकर ₹80*
*88. कबीर ग्रंथावली ₹30*
*89. अयोध्या में बौद्वो का वावरी महाविहार ₹40*
*90. भारत में जातियाँ ₹30*
*92. भारत की गुलामी में गीता की भूमिका₹100*
*93. भातीय नारी के उद्धारक डा. अम्बेडकर ₹80*
*94. दलित राजनीती और नेता ₹80*
*95. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में डा. अम्बेडकर की भूमिका ₹250*
*96. बाबा साहेब डा. अम्बेडकर व्यक्ति परिचय ₹75*
*97. डा. अम्बेडकर जीवन परिचय ₹75*
*98. बौद्ध धर्म एवम् संस्कृति (डा. बी पी अशोक) ₹200*
*99. बुद्धम् सरणं गच्छामि ( डा.बी पी अशोक) 150*
*100. सम्राट अशोक एक ऐतिहासिक नाटक ( डा.बी पी अशोक) ₹75*
*101. ओ बी सी साहित्य विमर्श ₹100*
*102. भारतीय समाज में वर्ण भेद ₹60*
*103. सुहाग वनाम सिंदूर ₹40*
*104. आरक्षण मिथक या तथ्य ₹80*
*105. युग प्रवर्तन महिलाये ₹70*
*106. अयोध्या किसकी ₹250*
*107. धर्म के नाम पर ₹100*
*108. हिन्दू वर्चस्व का नरक ₹250*
*109. योग्यता मेरी जूती ₹30*
*110. राक्षस राज रावण ₹30*
*111. धार्मिक अंध विश्वासो का पर्दाफास ₹50*
*112. त्योहारो के रहष्य ₹75*
*113. रावण और उसकी लंका ₹40*
*114. धार्मिक कौन ₹40*
*115. अछुत का बेटा ₹40*
*116. क्या आपके पास इन सवालो के जवाब है₹40*
*117.क्या आप भी ईश्वर दर्सन करना चाहते है ₹40*
*118. रावण को बुद्ध का उपदेश ₹40*
*119. मनुस्मृति की सव परीक्षा ₹60*
*120. विश्व में फैली मिथ्या ₹50*
*121. हरिजन कौन ₹30*
*122. बाबा साहेब का जीवन व संघर्ष यात्रा ₹400*
*123. अशोक कालीन दीपदानोत्सव (जो दीवाली बन गया) ₹50*
*124. महान सम्राट अशोक ₹100*
*125. महाराजा बलि और उनका वंश ₹80*
*126. मान्यवर कांसी राम जी की संपादकीय ₹175*
*127. डॉ. अम्बेडकर जीवन दर्शन ₹80*
*128. एकलब्य खंड काब्य ₹50*
*129. बिरसा मुंडा और उनका आंदोलन ₹60*
*130. तथागत बुद्ध जीवनी और देशनए ₹175*
*131. बौद्ध धर्म और साम्यवाद ₹80*
*132. धम्म अधम्म तथा सधम्म में क्या अन्तर है₹40*
*133. बुद्ध ही भगवान थे ₹50*
*134. मिलिंद पह ( तिपिटक ग्रंथमाला)₹200*
*135. पाली हिंदी कोस ₹200*
*136. कोलिय गण इतिहास ₹150*
*137. विपस्सना ₹125*
*138. बौद्ध संस्कृति बनाम ब्राह्मणवाद ₹250*
*138. बुद्ध धम्म, बुद्धिवाद व् अम्बेडर ₹300*
*139. बौद्ध संस्कृति ₹350*
*140. आदर्श जातक कथाये ₹350*
*141. जह जह चरण परे गौतम के ₹250*
*142. अभिधर्म कोश (सेट4) में ₹555*
*143. जातक अट्ठकथा (सेट ऑफ़ 6) ₹1950*
*144. बौद्ध जीवन कैसे जीए ₹150*
*145. बाबासाहेब डा. आम्बेडकर के विचार ₹250*
*146. भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में डा. आम्बेडकर की भूमिका ₹250*
*147. प्राचीन भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति ₹250*
*148. पंचाल राजवंश का प्राचीन इतिहास ₹225*
*149. सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास ₹200*
*150. अछुत कौन और कैसे ₹80*
*151. 11 उपनिसद सग्रह भाषा टिका सहित ₹400*
*152. हिन्दू कोड बिल ₹200*
*153. पवित्र गाय का मिथक ₹200*
*154. मनु बनाम लादेन ₹200*
*155. पुराणों में बुध ₹200*
*156. महान पत्रकार बाबा साहेब आम्बेडकर ₹300*
*157. दलित समाज और राजनीती ₹125*
*158. डा. आम्बेडकर के भासण ₹150*
*159. शहीद ऊधम सिंह ₹100*
*160. संबिधान निर्माण और उसके निर्माता ₹80*
*161. नागपुर का धम्मोपदेश ₹10*
*162. काठमांडू का भासण ₹25*
*163. तीसरी आजादी की सिंह गर्जना ₹100*
*164. मैं नास्तिक क्यों ₹150*
*167. बौद्ध धर्म नहीं है हिन्दू धर्म की साखा ₹70*
*168. ब्राह्मण वनाम ब्राह्मणवाद ₹60*
*169. बौद्ध धर्म में नारी ₹20*
*170. बुद्ध का प्रथम उपदेश ₹15*
*171. सचित्र भीम जीवनी ₹70*
*172. संत कवीर वाणी में बौद्ध चिंतन ₹150*
*173. चमार रेजिमेंट और उसके बहादुर सैनिको के विद्रोह की कहानी उन्ही के जुबानी ₹200*
*174. चमार रेजिमेंट के तीन जीवित सैनिको के इंटरव्यू ₹50*
*175. ग्रेटेस्ट इण्डिया बाबा साहेब डा. अम्बेडकर ₹50*
*176. सन्त कवीर पंडितो से क्या कहते है ₹70*
*177. सद गुरु कबीर साहब की व्रत कथा ₹30*
*178. किशन का कोणा ₹300*
*179. बहुजन विरोधी भारतीय राजनीति का काला इतिहास ₹500*
*180. हिन्दू धर्म संस्कृति एव आधुनिक हिंदी कथा साहित्य में शुद्र वर्ग के चरित्र हनन की परंपरा ₹200*
*181. सफाई मजदुर दिवश ₹40*
*182. शम्बूक का वलिदान ₹60*
*183. मूल भारतवासी और आर्य ₹125*
*184. शासन वंश बुद्ध धम् का इतिहास ₹500*
*185. मराठी संत साहित्य में बौद्ध अवधारणाएं ₹350*
*186. अयोध्या किसकी ₹250*
*189. चवर पुराण ₹50*
*190. विज्ञानं की भासा में धर्म ₹250*
*191. मोची का बेटा ₹80*
*192. आखिर दलित अस्पृश्य क्यों ₹30*
*193. डा. आंबेडकर की दिनचर्या ₹40*
*194. बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की अर्थनीति, धर्मनीति एवम् राजनीती ₹200*
*195. क्या आजादी का आंदोलन आजादी के लिए था ₹100*
*199. सुअरदान ₹250*
*200. दलित वनाम पिछड़ा वर्ग ₹125*
*201. बहुजन नायक कांशीराम की ललकार ₹175*
*201. कलुआ डोम ₹100*
*202. ईश्वर दलाल ₹30*
*203. डा. आम्बेडकर के प्रेरक भासण ₹150*
*204. बाबा साहेब द्वारा लड़े गए मुकदमे ₹200*
*205. कहू कबीर ₹100*
*206. ऐतिहासिक एक आंदोलन के प्रवर्तन महानायक मदारी पासी ₹100*
*207. युग पुरुष बाबा साहेब डा. भीम राव आंबेडकर ₹225*
*208. भारत के सामाजिक क्रांति के पथ- प्रदर्शक ज्योतिबा फुले ₹300*
*209. बुद्ध चरित्र चंद्रोदय ₹400*
*210. दलित समाज पुरानी समस्याएं नयी आकांक्षाएं₹60*
*211. हिन्दू कोड बिल इतिहास और संघर्ष ₹200*
*212. इंडिका प्राचीन भारतीय इतिहास ₹350*
*213. डा. आम्बेडकर का जीवन संघर्ष ₹80*
*214. ईश्वर ने नही बनाई दुनिया ₹60*
*215.मार्क्स ने कहा धर्म एक अफीम ₹100*
*216. धर्म ग्रंथो का पुर्नपाठ ₹125*
*217. हिंदुत्व के दुर्ग₹125*
*218. धम्मा डोर वेल ₹250*
*219. राष्ट्रविधाता चंद्र गुप्त मौर्य ₹100*
*220. डा. आंबेडकर कुछ अनछुए प्रसंग ( नानक चाँद रत्तू) ₹200*
*221. डा. आंबेडकर के कुछ अंतिम वर्ष ₹200*
*222. प्रेमी की लड़िया ( भाग 1 से 5) ₹125*
*223. बुद्ध या युद्ध ( गीत)₹15*
*224. प्रेमी की दृस्टि ( गीत) ₹15*
*225. बौद्ध जागरण (गीत )₹20*
*226. सरे जहां से अच्छा आंबेडकर हमारा ₹30*
*227. भीम जागृति गीत माला (गीत)₹20*
*228. बहुजन की पुकार ( गीत) ₹20*
*229. बौद्ध महिला गायन ( गीत)₹20*
*230. मनुवाद का भंडाफोड़ (गीत)₹20*
*231. तिपिटक साहित्य सेट 16 बुक्स ₹5660*
*A1.उदान ₹200*
*2. मिलिंदपह ₹200*
*3. इतिवुत्तक ₹30*
*4. विसुद्धिमग्ग भाग 1से2 ₹500*
*5. विनय पिटक ₹300*
*6. मज्झिम निकाय ₹350*
*7. दीघनिकाय ₹350*
*8. अंगुत्तर निकाय भाग -1₹350*
*9. अंगुत्तर निकाय भाग-2 ₹450*
*10. संयुक्त निकाय भाग 1-2 ₹750*
*11. थेरगाथा ₹250*
*12. थेरीगाथा ₹250*
*13. सुत्तनिपात ₹200*
*14. धम्मपद: गाथा और कथा ₹1000*
*15. अभिधम्मत्थसंगहो ₹80*
*232. वेद ( चार बुक्स सेट) ₹2200*
*A. ऋग्वेद ₹650*
*B. अथर्वेद ₹700*
*C. सामवेद ₹400*
*D. यजुर्वेद ₹450*
*233. बहुजन गीत₹15*
*234. सभी हमारे बहुजन महापुरषो की पोस्टर ( साइज 18"×24") फ्रेमिंग लेमिनिटेड फोटो,( लकड़ी की फ्रेमिंग होगी) पर फोटो ₹500 *
*235. बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञा का भी फ्रेमिंग सहित उपलब्ध है।₹500*
*236. इसारा ज्योति राव फुले ₹50*
*237. पंजाब में बौद्ध धर्म ₹125*
*238. वंदामी बोद्धिवृक्ष ₹100*
*239. भारत को किसने कमजोर किया: बुद्धइज्म ने या ब्राह्मणइज्म ने ₹75*
*240. बाबा साहब और भंगी जाती ₹45*
*241. मैं भंगी हूँ ₹100*
*242. वाल्मीकि जाति उदभव, विकाश और वर्तमान समस्या ₹150*
*243. मा. कांसीराम साहब और सामाजिक परिवर्तन ₹30*
*244. मूक नायक ₹150*
*245. बृहद्रथ मौर्य की हत्या ₹125*
*246. हिन्दू संस्कृति ( हिन्दुओ का सामाजिक विघटन)₹100*
*247. चमार रेजिमेंट ₹175*
*248. ज्योतिबा फुले की अमर कहानी ₹80*
*249. महार रेजिमेंट ₹200*
*250. फूलन देवी जीवनी ₹60*
*251. नन्दों और सेनों उत्पत्ति और इतिहास ₹250*
*252. बाद के हड़प्पायो का इतिहास तथा शिल्पकार आंदोलन ₹250*
*253. बाबा साहेब ने क्यों कहा था की मुझे पढ़े लिखो ने धोखा दिया था ₹40*
*254. भारत की गुलामी के सात कारण ₹80*
*255. मंगल सूत्र का रहस्य ₹ 70*
*256. सात फेरो का भ्रमजाल ₹40*
*257. भीम जीवनी ₹70*
*258. भीम चरित्र मानस ₹400*
*259. डा. आम्बेडकर का शिक्षा में योगदान ₹125*
*260. तिब्बत में बौद्ध धर्म का इतिहास ₹250*
*261. सभी बहुजन महा पुरषो की जीवनी 70×14=980*
*262.कबीर वनाम तुलसी ₹125*
*263. डा. आंबेडकर की दृष्टि में बौद्ध धर्म ₹300*
*264. राजस्थान की प्रमुख अनुसूचित जातियाँ ₹200*
*265. गुजरात की प्रमुख अनुसूचित जातियाँ ₹125*
*266. स्वतंत्र चिंतन कर्नल ईग्लोल के निबंध 100*
*267. बाबा साहेब की विदेश नीति ₹250*
*268. डा. आम्बेडकर के पत्र ₹125*
*269. जगत सत्य ₹100*
*270. बौद्ध चर्या प्रकाश ( विवाह संस्कार विधि सहित) ₹100*
*271. बाबा साहेब डा. आम्बेडकर जीवन और चिंतन खंड 1 ₹175*
*272. बाबा साहेब डा. आम्बेडकर जीवन और चिंतन भाग 2 ₹300*
*273. बाबा साहेब डा. आम्बेडकर जीवन और चिंतन भाग 3 ₹250*
*274. बाबा साहेब डा. आंबेडकर जीवन और चिंतन भाग 4 ₹300*
*275.बाबा साहेब डा.आंबेडकर जीवन और चिंतन भाग 5 ₹300*
*जय भीम* *नमो बुद्धाय* *जय भारत*
*साधुवाद साधुवाद*
*भवतु सब्ब मंगलम्*
*कापी* *पेस्ट* *शेयर* *प्लीज*
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जय भीम के जनक
"जय भीम" शब्द के जनक कौन थे?
"जय भीम" आज बहुजन अस्मिता और एकता का प्रतीक बन चुका है. हर बहुजन युवा उत्साह से "जय भीम" के साथ एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं. "जय भीम" शब्द की उत्पत्ति महाराष्ट्र में हुई. इस "जय भीम" शब्द के जनक बाबू हरदास एल. एन. थे, जो 1921 में बाबासाहब डाॅ अम्बेडकर के साथ सामाजिक आंदोलन में उतरे. बाबू हरदास का परिवार पढ़ा-लिखा था. पिता लक्ष्मण उरकुडा नगराले रेलवे विभाग में बाबू थे. उस समय देश में वर्णभेद और जाति भेद के कारण भीषण सामाजिक और आर्थिक विषमता फैली हुई थी. सन 1922 में महाराष्ट्र के अछूत संत चोखामेला के नाम पर उन्होंने एक छात्रावास शुरू किया. 1924 में उन्होंने एक प्रिंटिंग प्रेस खरीदी थी और सामाजिक जागृति के लिये "मंडई महात्म्य" नामक किताब सामाजिक जागृति के लिये लिखी थी, साथ ही "चोखामेला विशेषांक" भी निकाला था.
बाबासाहब के आंदोलनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 1930 के नासिक कालाराम मंदिर सत्याग्रह तथा 1932 में पूना पैक्ट के दौरान उन्होंने बाबासाहब के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
"जय भीम" का संबोधन पहली बार उनके मन में एक मुस्लिम व्यक्ति को देखकर आया. उस समय कार्यकर्त्ताओं के साथ घूमते हुये रास्ते में एक मुस्लिम को दूसरे मुस्लिम से "अस्सलाम-अलेकुम" कहते हुये सुना. जवाब में दूसरे व्यक्ति ने भी "अलेकुम-सलाम" कहा. तब बाबू हरदास ने सोचा कि हमें एक दूसरे से क्या कहना चाहिये? उन्होंने कार्यकर्त्ताओं से कहा, "मैं 'जय भीम' कहूँगा और आप 'बल भीम' कहिये. उस समय से ये अभिवादन शुरू हो गया, पर बाद में 'बल भीम' प्रचलन से गायब हो गया, केवल 'जय भीम' ही प्रचलन में रहा. 1933-34 में बाबू हरदास ने समता सैनिक दल को 'जय भीम' का नारा नागपुर में दिया. इस तरह 'जय भीम' हर जगह छा गया. बाद में डाॅ अम्बेडकर ने खुद भी 1949 में अपने पत्रों में जय भीम लिखना और कहना शुरू कर दिया था. 12 जनवरी 1939 को उनका परिनिर्वाण हो गया था. उस दिन उनको श्रद्धांजलि देते समय बाबासाहब ने कहा था, "बाबू हरदास के रूप में मेरा दाहिना हाथ चला गया."
जय भीम
ओबीसी के साथ छलावा
*इसे सभी लोग पढ़ें..*
1977 मेँ जनता पार्टी कीसरकार बनी जि *मोरारजी द ब्राह्मण थे* जिनको _जयप्रकाश नारायण_ द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिऐ नामांकित किया था।
चुनाव मेँ जाते समय *जनता पार्टी* ने अभिवचन दिया था कि यदि उनकी सरकार बनती है तो वे *काका कालेलकर कमीशन* लागू करेंगे। जब उनकी सरकार बनी तो *OBC का एक प्रतिनिधिमंडल* मोरारजी को मिला और *काका कालेलकर कमीशन* लागू करने के लिऐ मांग की मगर _मोरारजी_ ने कहा कि _*कालेलकर कमीशन*_ की रिपोर्ट पुरानी हो चुकी है, इसलिए अब बदली हुई परिस्थिति मेँ नयी रिपोर्ट की आवश्यकता है। *यह एक शातिर बाह्मण की OBC को ठगने की एक चाल थी*।
प्रतिनिधिमडंल इस पर सहमत हो गया और *B.P. Mandal* जो बिहार के यादव थे, उनकी अध्यक्षता मेँ *मंडल कमीशन* बनाया गया।
बी पी मंडल और उनके कमीशन ने पूरे देश में घूम-घूमकर 3743 जातियोँ को OBC के तौर पर पहचान किया जो 1931 की जाति आधारित गिनती के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 52% थे। मंडल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट मोरारजी सरकार को सौपते ही, पूरे देश मेँ बवाल खङा हो गया। जनसंघ के 98 MPs के समर्थन से बनी जनता पार्टी की सरकार के लिए मुश्किल खङी हो गयी।
उधर *अटल बिहारी बाजपेयी* के नेतृत्व मेँ जनसंघ के MPs ने दबाव बनाया कि अगर मंडल कमीशन लागू करने की कोशिश की गयी तो वे सरकार गिरा देंगे। दूसरी तरफ OBC के नेताओँ ने दबाव बनाया ।
*फलस्वरूप अटल बिहारी बसजपेयी ने मोरारजी की सहमति से जनता पार्टी की सरकार गिरा दी।*
इसी दौरान भारत की राजनीति मेँ एक Silent revolution की भूमिका तैयार हो रही थी *जिसका नेतृत्व आधुनिक भारत के महानतम् राजनीतिज्ञ कांशीराम जी कर रहे थे*।
कांशीराम साहब और डी के खापर्डे ने 6 दिसंबर 1978 में अपनी बौद्धिक बैँक *बामसेफ* की स्थापना की जिसके माध्यम से पूरे देश मेँ OBC को मंडल कमीशन पर जागरण का कार्यक्रम चलाया। *कांशीराम जी के जागरण अभियान के फलस्वरूप देश के OBC को मालुम पड़ा कि उनकी संख्या देश मेँ 52% मगर शासन प्रशासन में उनकी संख्या मात्र 2% है।* *_जबकि 15% तथाकथित सवर्ण प्रशासन में 80% है। इस प्रकार सारे आंकङे मण्डल की रिपोर्ट मेँ थे जिसको जनता के बीच ले जाने का काम कांशीराम जी ने किया।_*
अब OBC जागृत हो रहा था। उधर अटल बिहारी ने जनसंघ समाप्त करके BJP बना दी। 1980 के चुनाव मेँ संघ ने इंदिरागांधी का समर्थन किया और इंन्दिरा जो 3 महीने पहले स्वयं हार गयी थी 370 सीट जीतकर आयी।
*इसी दौरान गुजरात में आरक्षण के विरोध में प्रचंड आन्दोलन चला*।
*_मजे की बात यह थी कि इस आन्दोलन में बङी संख्या OBC स्वयँ सहभागी था_*, *क्योँकि ब्राह्मण-बनिया "मीडीया" ने प्रचार किया कि जो आरक्षण SC,ST को पहले से मिल रहा है वह बढ़ने वाला है।*
गुजरात में अनु. जाति के लोगों के घर जलाये गये। *नरेन्द्र मोदी* इसी आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता थे।
कांशीराम जी अपने मिशन को दिन-दूनी रात-चौगुनी गति से बढा रहे थे।
ब्राह्मण अपनी रणनीति बनाते पर
उनकी हर रणनीति की काट कांशीराम जी के पास थी। *कांशीराम ने वर्ष 1981 में DS4 ( DSSSS) नाम की "आन्दोलन करने वाली विंग" को बनाया।* जिसका नारा था *'ब्राह्मण बनिया ठाकुर छोङ बाकी सब हैं DS4!'*
DS4 के माध्यम से ही कांशीराम जी ने एक और प्रसिद्ध नारा दिया *"मंडल कमीशन लागु करो वरना सिँहासन खाली करो।'* इस प्रकार के नारो से पूरा भारत गूँजने लगा।
1981 में ही *मान्यवर कांशीराम* ने *हरियाणा का विधानसभा* चुनाव लङा, 1982 मेँ ही उन्होने *जम्मू काश्मीर का विधान सभा* का चुनाव लङा।
*अब कांशीराम जी की लोकप्रियता अत्यधिक बढ गयी।*
*_ब्राह्मण-बनिया "मीडिया"_* ने उनको बदनाम करना शुरू कर दिया। उनकी बढती लोकप्रियता से इंन्दिरा गांधी घबरा गयीं।
इंन्दिरा को लगा कि अभी-अभी *जेपी के जिन्न*से पीछा छूटा कि *अब ये कांशीराम तैयार हो गये।* इंन्दिरा जानती थी कांशीराम जी का उभार जेपी से कहीँ ज्यादा बङा खतरा ब्राह्मणोँ के लिये था। उसने संघ के साथ मिलने की योजना बनाई।
अशोक सिंघल की एकता यात्रा जब दिल्ली के सीमा पर पहुँची, तब इंन्दिरा गांधी स्वयं माला लेकर उनका स्वागत करने पहुंची।
*इस दौरान भारत में एक और बङी घटना घटी।*
भिंडरावाला जो खालिस्तान आंदोलन का नेता था, जिसको कांग्रेस ने अकाल तख्त का विरोध करने के लिए खङा किया था, उसने स्वर्णमंदिर पर कब्जा कर लिया।
RSS और कांग्रेस ने योजना बनाई अब मण्डल कमीशन आन्दोलन को भटकाने के लिऐ *हिन्दुस्थान vs खालिस्थान* का मामला खङा किया जाय। *इंन्दिरा गांधी आर्मी प्रमुख जनरल सिन्हा को हटा दिया और एक साऊथ के ब्राह्मण को आर्मी प्रमुख बनाया।* जनरल सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया।
आर्मी में भूचाल आ गया। नये आर्मी प्रमुख इंन्दिरा गांधी के कहने पर OPERATION BLUE STAR
की योजना बनाई और स्वर्ण मंदिर के अन्दर टैँक घुसा दिया।
पूरी आर्मी हिल गयी। पूरे सिक्ख समुदाय ने इसे अपना अपमान समझा और 31 Oct. 1984 को इंन्दिरा गांधी को उनके दो Personal guards बेअन्तसिह और सतवन्त सिँह, जो दोनो *अनुसुचित जाति* के थे, ने इंन्दिरा गांधी को गोलियों से छलनी कर दिया।
*_माओ_ अपनी किताब _'ON CONTRADICTION'_ में लिखते हैं कि शासक वर्ग किसी एक षडयंत्र को छुपाने के लिऐ दुसरा षडयंत्र करता है, पर वह नहीँ जानता कि इससे वह अपने स्वयँ के लिए कोई और संकट खङा कर देता है।'* _माओ_की यह बात भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य मेँ सटीक साबित होती है।
*मंडल कमीशन को दबाने वाले षडयंत्र का बदला शासक वर्ग ने 'इंन्दिरा गांधी' की जान देकर चुकाया।*
इंन्दिरा गांधी की हत्या के तुरन्त बाद राजीव गांधी को नया प्रधानमंत्री मनोनीत कर दिया गया। जो आदमी 3 साल पहले पायलटी छोङकर आया था, वो देश का *'मुगले आजम'* बन गया। *इंन्दिरा गांधी की अचानक हत्या से सारे देश मेँ सिक्खोँ के विरूद्ध माहौल तैयार किया गया। दंगे हुऐ। अकेले दिल्ली में 3000 सिक्खो का कत्लेआम हुआ जिसमें तत्कालीन मंत्री भी थे।* उस दौरान *राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिँह* का फोन तक *प्रधनमंत्री राजीव गांधी*ने रिसीव नहीँ किये। उधर कांशीराम जी अपना अभियान
जारी रखे हुऐ थे। *उन्होनेँ अपनी राजनीतिक पार्टी BSP की स्थापना की* और सारे देश में साईकिल यात्रा निकाली। *कांशीराम जी ने एक नया नारा दिया _"जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी ऊतनी हिस्सेदारी।"_*
*कांशीराम जी मंडल कमीशन का मुद्दा बङी जोर शोर से प्रचारित किया, जिससे उत्तर भारत के पिछङे वर्ग मेँ एक नयी तरह की सामाजिक, राजनीतिक चेतना जागृत हुई।*
*_इसी जागृति का परिणाम था कि पिछङे वर्ग नया नेतृत्व जैसे कर्पुरी ठाकुर, लालु, मुलायम का उभार हुआ।_*
अब कांशीराम शोषित वंचित समाज के सबसे बङे नेता बनकर उभरे। वही 1984 का चुनाव हुआ पर इस चुनाव कांशीराम ने सक्रियता नहीँ दिखाई ।पर राजीव गांधी को सहानुभुति लहर का इतना फायदा हुआ कि राजीव गांधी 413 MPs चुनवा कर लाये। जो राजीव जी के नाना ना कर सके वह उन्होने कर दिखाया।
*सरकार बनने के बाद फिर मण्डल का जिन्न जाग गया।* OBC के MPs संसद मेँ हंगामे शुरू कर दिये । शासक वर्ग फिर नयी व्युह रचना बनाने की सोची।
*अब कांशीराम जी के अभियानो के कारण OBC जागृत हो चुका था।* अब शासक वर्ग के लिऐ मंडल कमीशन का विरोध करना संभव नहीँ था।
*2000 साल के इतिहास मेँ शायद ब्राह्मणोँ ने पहली बार कांशीराम जी के सामने असहाय महसूस किया।*
कोई भी राजनीतिक उदेश्य इन तीन साधनोँ से प्राप्त किया जा सकता है वह है-
*1) शक्ति संगठन की,*
*2) समर्थन जनता का* और
*3) दांवपेच नेता का।*
कांशीराम जी के पास तीनो कौशल थे और दांवपेच के मामले मेँ वे ब्राह्मणोँ से 21 थे। अब यह समय था जब कांग्रेस और संघ की सम्पूर्ण राजनीतिक केवल कांशीराम जी पर ही केन्द्रित हो गया।
1984 के चुनावोँ में बनवारी लाल पुरोहित ने मध्यस्थता कर राजीव गांधी और संघ का समझौता करवाया एवं इस चुनाव मेँ संघ ने राजीव गांधी का समर्थन किया। *गुप्त समझौता यह था कि राजीव गांधी राम मंदिर आन्दोलन का समर्थन करेगेँ और हम मिलकर रामभक्त OBC को मुर्ख बनाते है।*
राजीव गांधी ने ही बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाये, उसके अन्दर राम के बाल्यकाल की मूर्ति भी रखवाईं ।
*अब ब्राह्मण जानते थे अगर मण्डल कमीशन का* विरोध *करते है तो "राजनीतिक शक्ति" जायेगी, क्योकि 52% OBC के बल पर ही तो वे बार बार _देश के राजा_ बन जाते थे, और* समर्थन *करते हैं तो कार्यपालिका में जो उन्होने _स्थायी सरकार_ बना रखी थी वो छिन जाने खा खतरा था।*
विरोध करें तो खतरा, समर्थन करें तो खतरा। करें तो क्या करें?
तब कांग्रेस और संघ मिलकर OBC पर विहंगम दृष्टि डाली तो *उनको पता चला कि पूरा OBC रामभक्त है।*
उन्होँने *मंडल के आन्दोलन* को *कमंडल* की तरफ मोङने का फैसला किया। *सारे देश में राम मंदिर अभियान छेङ दिया।* बजरंग दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया जो पिछङा था।
कल्याण सिंह, रितंभरा, ऊमा भारती, गोविन्दाचार्य आदि वो मुर्ख OBC थे जिनको संघ ने सेनापति बनाया।
जिस प्रकार ये लोग हजारोँ सालो से ये पिछङो में विभीषण पैदा करते रहे इस बार भी इन्होंने ऐसा ही किया।
वहीँ दूसरी तरफ *अनियंत्रित राजीव गांधी ने खुद को अन्तर्राष्ट्रीय नेता बनाने एवं मंडल कमीशन का मुद्दा दबाने के लिऐ प्रभाकरण से समझौता किया* तथा प्रभाकरण को वादा किया कि जिस प्रकार उसकी माँ (इंदिरागांधी) ने पाकिस्तान का विभाजन कर देश-दुनिया की राजनीति में अपनी धाक पैदा की वैसे वह भी श्रीलंका का विभाजन करवाकर प्रभाकरण को तमिल राष्ट्र बनवाकर देगा।
वहीं राजीव गांधी की सरकार में वी.पी. सिंह रक्षा मंत्री थे।
*बोफोर्स रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार राजीव गांधी की सहायता से किया गया* जिसको उजागर किया गया। _यह राजीव गांधी की साख पर बट्टा था।_
वीपी सिंह इसको मुद्दा बनाकर अलग *जन मोर्चा* बनाया। अब असली घमासान था। 1989 के चुनाव की लङाई दिलकश हो चली थी। *पूरे उत्तर भारत में कांशीराम जी बहुजन समाज के नायक बनकर उभरे। उन्होने 13 जगहो पर चुनाव जीता जबकि 176 जगहोँ पर वे कांग्रेस का पत्ता साफ करने में सफल हो गये।*
राजीव गांधी जो कल तक दिल्ली का मुगल था कांशीराम जी के कारण वह रोड मास्टर बन गया। कांग्रेस 413 से धङाम 196 पर आ गयी। वी पी सिंह के गठबनधन 144 सीटें मिली, जिसके कारण वी पी सिंह ने चुनाव में जाने की घोषणा की और कहा कि यदि उनकी सरकार बनी तो मंडल कमीशन लागू करेंगे।
चन्द्रशेखर व चौधरी देवीलाल के साथ मिलकर सरकार बनाने की योजना वी पी सिंह द्वारा बनायी गयी। चौधरी देवीलाल प्रधानमंत्री पद के सबसे बङे दावेदार थे पर योजना इस प्रकार से बनायी गयी थी कि संसदीय दल की बैठक में दल का नेता (प्रधानमंत्री) चुनने की माला चौ. देवीलाल के हाथ में दे दी जाए । चौ. देवीलाल (इस झूठे सम्मान से कि नेता चुनने का हक़ उनको दिया गया) माला वी पी के गले में डाल दिया। *इस प्रकार वी पी सिंह नये प्रधानमंत्री बने।*
प्रधानमंत्री बनते ही OBC नेताओं ने मंडल कमीशन लागू करवाने का दबाव डाला। वी पी सिँह ने बहानेबाजी की पर अन्त में निर्णय करने के लिए चौ. देवीलाल की अध्यक्षता मेँ एक कमेटी बनायी।
याद रहे कि मंडल कमीशन के चैयरमैन बी. पी. मंडल यादव थे, शायद इसीलिए मंडल कमीशन की लिस्ट में उन्होने यादवों को तो शामिल कर लिया मगर जाटों को शामिल नही किया।
चौधरी देवीलाल ने कहा कि इसमे जाटों को शामिल करो फिर लागू करो मगर ठाकुर वी पी सिँह इनकार कर दिया।
चौधरी देवीलाल नाराज होकर कांशीराम जी के पास गये और पूरी कहानी सुनाकर बोले मुझे आपका साथ चाहिये। *कांशीराम जी बोले कि 'ताऊ तुझे जनता ने "Leader" बनाया मगर ठाकुर ने "Ladder" (सीढी) बनाया।*
तेरे साथ अत्याचार हुआ और दुनिया में जिसके साथ अत्याचार होता है कांशीराम उसका साथ देता है।' कांशीराम जी और देवीलाल ने वी पी सिंह के विरोध में एक विशाल रैली करने वाले थे। उसी दौरान शरद यादव और रामविलास पासवान ने वी पी सिंह से मुलाकात की। उन्होँने वी पी से कहा कि हमारे नेता आप नही बल्कि चौधरी देवीलाल है। अगर आप मंडल लागू कर दे तो हम आपके साथ रहेंगे अन्यथा हम भी देवीलाल और कांशीराम का साथ देंगे।
ठाकुर वी पी सिँह की कुर्सी संकट से घिर गयी। कुर्सी बचाने के डर से वी पी सिंह ने मंडल कमीशन लागू करने की घोषणा कर दी।
सारे देश मेँ बवाल खङा हो गया। *Mr. Clean से Mr. Corrupt बन चुके राजीव गांधी ने बिना पानी पिये संसद में 4 घंटे तक मंडल के विरोध में भाषण दिया।*
जो व्यक्ति 10 मिनिट तक संसद में ठीक से बोल नहीं सकता था, उसने OBC का विरोध अपनी पूरी ऊर्जा से पानी पी-पी कर किया और 4 घंटे तक बोला।
वी पी सिंह सरकार गिरा दी गयी। चुनाव घोषणा की हुयी और एम नागराज नाम के ब्राह्मण ने उच्चतम न्यायालय में आरक्षण के विरोध में मुकदमा (केश) कर दिया ।
इधर राजीव गांधी ने जो प्रभाकरण से वादा किया था वो पूरा नही कर सके थे बल्कि UNO के दबाव मे ऊन्होँने शांति सेना श्रीलंका भेज दी थी। राजीव गांधी के कहने पर प्रभाकरण के साथी कानाशिवरामन को BOMB बनाने की ट्रेनिँग दी गयी थी। जब प्रभाकरण को लगा कि राजीव गाँधी ने धोखा किया। उसने काना शिवरामन को राजीव गांधी की हत्या कर देने का आदेश दिया और मई 1991 मे राजीव गांधी को मानव बम द्वारा ऊङा दिया गया। *एक बार फिर माओ का कथन सत्य सिद्ध हुआ।*और मंडल के भूत ने राजीव गांधी की जान ले ली।
राजीव गांधी हत्या का फायदा कांग्रेस को हुआ। कांग्रेस के 271 सांसद चुनकर आये। शिबु सोरेन व एक अन्य को खरीदकर कांग्रेस ने सरकार बनायी। वी पी नरसिंम्हराव दक्षिण के ब्राह्मण प्रधानमंत्री बने।
दूसरी तरफ मंडल कमीशन के विरोध मे Supreme court के 31 आला ब्राह्मण वकील सुप्रीम कोर्ट पहुँच गये।
लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे, पटना से दिल्ली आये। सारे ब्राह्मण-बनिया वकीलों से मिले। कोई भी वकील पैसा लेकर भी मंडल के समर्थन में लङने के लिऐ तैयार नही था।
लालू यादव ने रामजेठमलानी से निवेदन किया मगर जेठमलानी Criminal Lawyer थे जबकि यह संविधान का मामला था, फिर भी रामजेठमलानी ने यह केस लङा। *मगर SUPREME COURT ने 4 बङे फैसले OBC के खिलाफ दिये।*
1. केवल 1800 जातियों को OBC माना।
2. 52% OBC को 52% देने की बजाय संविधान के विरोध में जाकर 27% ही आरक्षण होगा।
3. OBC को आरक्षण होगा पर प्रमोशन मेँ आरक्षण नहीँ होगा।
4. क्रीमीलेयर होगा अर्थात् *जिस OBC का INCOME 1 लाख होगा उसे आरक्षण नहीँ मिलेगा।*
इसका एक आशय यह था कि जिस OBC का लङका महाविद्यालय मेँ पढ रहा है उसे आरक्षण नहीँ मिलेगा बल्कि जो OBC गांव मेँ ढोर ढाँगर
चरा रहा है उसे आरक्षण मिलेगा।
*यह तो वही बात हो गई कि दांत वाले से चना छीन लिया और बिना दांत वाले को चना देने कि बात करता है ताकि किसी को आरक्षण का लाभ न मिले।*
ये चार बङे फैसले सुप्रीम कोर्ट के सेठ जी ऍव भट्टजी ने OBC के विरोध मेँ दिये। दुनिया की हर COURT में न्याय मिलता है जबकि भारत की SUPREME COURT ने 52% OBC के हक और अधिकारों के विरोध का फैसला दिया।
भारत के शासक वर्ग अपने हित के लिऐ सुप्रीम कोर्ट जैसी महान् न्यायिक संस्था का दुरूपयोग किया।
मंडल को रोकने के लिऐ कई हथकंडे अपनाऐ हुऐ थे जिसमें राम मंदिर आन्दोलन बहुत बङा हथकंडा था। उत्तर प्रदेश मेँ बीजेपी ने मजबूरी मेँ कल्याण सिंह जो कुर्मी थे उनको मुख्यमंत्री बनाया।
आपको बताता चलूं की कांशीराम जी के उदय के पश्चात् ब्राह्मणोँ ने लगभग हर राज्य में OBC मुख्यमंत्री बनाना शुरू किये ताकि OBC का जुङाव कांशीराम जी के साथ न हो। इसी वजह से एक कुर्मी को मुख्यमंत्री बनाया गया।
आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली। नरेन्द्र मोदी आडवाणी के हनुमान बने। *याद रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने मंडल विरोधी निर्णय 16 नवम्बर 1992 को दिया और शासक वर्ग ने 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गयी।* बाबरी मस्जिद गिराने मे कांग्रेस ने बीजेपी का पूरा साथ दिया। इस प्रकार सुप्रिम कोर्ट के निर्णय के बारे में OBC जागृत न हो सके, इसीलिए बाबरी मस्जिद गिराई गयी।
शासक वर्ग ने तीर मुसलमानों पर चलाया पर निशाना OBC थे। जब भी उन पर संकट आता है वे हिन्दु और मुसलमान का मामला खङा करते हैं। बाबरी मस्जीद गिराने के बाद कल्याणसिंह सरकार बर्खास्त कर दी गयी।
दूसरी तरफ कांशीराम जी UP के गांव गांव जाकर षडयंत्र का पर्दाफाश कर रहे थे। उनका मुलायम सिंह से समझौता हुआ। विधानसभा चुनाव हुए कांशीराम जी की 67 सीट एवं मुलायम सिँह को 120 सीटें मिली। बसपा के सहयोग से मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने।
*UP के OBC और SC के लोगों ने मिलकर नारा लगाया _"मिले मुलायम कांशीराम हवा मेँ ऊङ गये जय श्री राम।"_*
शासक जाति को खासकर ब्राह्मणवादी सत्ता को इस गठबन्धन से और ज्यादा डर लगने लगा।
इंडिया टुडे ने कांशीराम भारत के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं ऐसा ब्राह्मणोँ को सतर्क करने वाला लेख लिखा। *इसके बाद शासक वर्ग अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव किया। लगभग हर राज्य का मुख्यमंत्री ऊन्होनेँ शूद्र(OBC) बनाना शुरू कर दिये। साथ ही उन्होने दलीय अनुशासन को कठोरता से लागू किया ताकि निर्णय करते वक्त वे स्वतंत्र रहें।*
*1996 के चुनावों में कांग्रेस फिर हार गयी और दो तीन अल्पमत वाली सरकारें बनी। यह गठबन्धन की सरकारें थी। इन सरकारों में सबसे महत्वपुर्ण सरकार H.D. देवेगौङा (OBC) की सरकार थी जिनके कैबिनेट में एक भी ब्राह्मण मंत्री नही था। आजाद भारत के इतिहास मे पहली बार ऐसा हुआ जब किसी प्रधानमंत्री के केबिनेट मे एक भी ब्राह्मण मंत्री नही था।* इस सरकार ने बहुत ही क्रांतिकारी फैसला लिया। वह फैसला था OBC की गिनती करने का फैसला जो मंडल का दूसरी योजना थी, क्योँकि 1931 के आंकङे बहुत पुराने हो चुके थे। OBC की गिनकी अगर होती तो देश मे OBC की सामाजिक, आर्थिक स्थिति क्या है और उसके सारे आंकङे पता चल जाते। इतना ही नही 52% OBC अपनी संख्या का उपयोग राजनीतिक ऊद्देश्य के लिऐ करता तो आने वाली सारी सरकारेँ OBC की ही बनती। शासक वर्ग के समर्थन से बनी देवेगोङा की सरकार फिर गिरा दी गयी।
शासक वर्ग जानता है कि जब तक OBC धार्मिक रूप से जागृत रहेगा तब तक हमारे जाल मेँ फँसता रहेगा जैसे 2014 मेँ फंसा। शायद जाति अधारित गिनती ओबीसी की करने का निर्णय देवेगौङा सरकार ने नहीं किया होता तो शायद उनकी सरकार नही गिरायी जाती।
ब्राह्मण अपनी सत्ता बचाने के लिये हरसंभव प्रयत्न में लगे रहे। वे जानते थे कि अगर यही हालात बने रहे थे तो ब्राह्मणों की राजनीतिक सत्ता छीन ली जायेगी।
जो लोग सोनिया को कांग्रेस का नेता नहीँ बनाना चाहते थे वे भी अब सोनिया को स्वीकार करने लगे।
कांग्रेस वर्किग कमेटी मे जब शरद पवार ने सोनिया के विदेशी होने का मुद्दा उठाया तो आर.के. धवन नामक ब्राह्मण ने थप्पङ मारा। पी ऐ संगमा, शरद पवार, राजेश पायलट, शरद पवार, सीताराम केसरी, सबको ठिकाने लगा दिया। शासक वर्ग ने गठबन्धन की राजनीति स्वीकार ली।
उधर अटल बिहारी कश्मीर पर गीत गाते गाते 1999 मे फिर प्रधानमंत्री हुऐ। अगर कारगिल नही हुआ होता तो अटल फिर शायद चुनकर आते। सरकार बनाते ही अटल बिहारी ने संविधान समीक्षा आयोग बनाने का निर्णय लिया।
*अरूण शौरी ने बाबासाहब अम्बेडकर को अपमानित करने वाली किताब 'Worship of false gods' लिखी।* इसके विरोध मेँ सभी संगठनो ने विरोध किया। विशेषकर बामसेफ के नेतृत्व मेँ 1000 कार्यक्रम सारे देश में आयोजित किये गये। अटल सरकार ने अपना फैसला वापस (पीछे) ले लिया।
ये भी नया हथकंडा था वास्तविक मुद्दो को दबाने का। फिर 2011 में जनगणना होनी थी। मगर OBC की जनगणना नहीँ करने का फैसला किया गया। *इसलिए भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में संख्याबल के हिसाब से शासक बनने वाला ओबीसी वर्ग सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मणवादी/मनुवादी शासकों का पिछलग्गू बन कर रह गया है। वो अपना नुकसान तो कर ही रहा है, साथ में अपने दलित भाई बंधुओं का भी नुकसान कर रहा है, जो ब्राह्मणवादी सत्ता को समाप्त करने का निरंतर प्रयत्नशील हैं*
*जय भीम। जय भारत।
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