आप अभी लिखने /बोलने /प्रतिरोध करने से डरते है -
कही दशकों की मेहनत से पाई पद /पैसा /प्रतिष्ठा छीन न जाए ,
वो भी तब जब देश का अपना लोकतांत्रिक सविधान है जिसमे आपके समस्त मौलिक अधिकारों का प्रावधान है और उसी सविधान के अनुरूप कार्य करने के लिए बाध्य सरकार ।
सोचिये उस दिन क्या होगा जब पुनः एक बार सविधान से नहीं मनुस्मृति से चलने वाली सरकार होगी ?
सूना है छत्तीसगढ़ में 1741 मरहट्ठा शासन के पूर्व 6713 मैदानी गाँवों में 3507 गाँव राजा महाराजा के पास 331 गाँव पिछड़ी जाति के पास 2875 अन्य जातियों के पास जमीदारी और मालगुजारी /गौटियानी हुआ करती थी ।जिसे कालान्तर में शोषकों द्वारा सब कुछ छीन लिया गया।
सब सत्ता/ताकत के बल पर ।
मान सम्मान /धन दौलत /घर बार सब छीन लिया गया ।
फिर आप किस पद /पैसा /और प्रतिष्ठा की चिंता कर रहे है ।
वो तभी तक सुरक्षित है जब तक सविधान सुरक्षित है ।
जय भीम जय सविधान
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