"Virat Satya
बाबा साहेब अम्बेडकर जी , अमेरिका के
हार्वर्ड लाईब्रेरी में गए तो वहाँ एक
किताब मिला :"दी लाइफ ऑफ़ घासीदास
छत्तीसगढ़" उसमे लिखा था गुरु घासीदास
जी का जन्म माता अमरौतिन -
पिता महंगू से दिनाक १८ दिसम्बर सन
१७५६ , ६ फूट ऊँचा हष्ट -पुष्ट
गोरा बदन, राजसी ड्रेस,सर में
कीमती पगड़ी व पैरो में जूते पहने थे.और
लिखा था "दी ग्रेट मेन ऑफ़ घासीदास
छत्तीसगढ़" इस बात को बाबा साहेब
अम्बेडकर जी ने अपनी डायरी निकालकर
"महामानव दादा नकुल देव ढीढी"
को नोट करवाया तथा जयंती मनाने
को कहा.
सतनामी समाज गुरु जी कि जन्म दिवस
को सन १९३८ में पहली बार ग्राम
भोरिंग में मनाया, तो १८२ साल बाद
जाने सरकार ने २१९ साल बाद रायपुर
गजेटियर में लिखे.
नक़ल बंदोबस सन १८६७-६८
मौजा बोड़सरा तहसील बिलासपुर प.ह.न.,
७० बंदोबस नंबर ४१९ में २९० एकड़
भूमि दर्ज है.
इसी प्रकार सेंट्रल चीफ कमिशनर ने
अगरदास वल्द घासीदास
को भैंसमुण्डी का मालिकाना हक़
सैकड़ो एकड़ ज़मीन का हक़ दिनाक ३०
अगस्त सन १८६४ को देकर सूबेदार पद पर
नियुक्त किया था.
बाबा गुरु घासीदास जी के जीवन-मिशन
के संघर्ष को आँखों देखा कोई भारतीय
इतिहास कारो ने नहीं लिखा है,
बल्कि उनके संघर्ष को २०-२५ अंग्रेज
इतिहास कारो ने लिखा!
तत्कालीन गवर्नर कर्नरल ऐगनू ने सबसे
पहले बाबा गुरु घासीदास जी के सम्बन्ध में
सन १८२० से लेखनी प्रारम्भ किया इसके
बाद सन १८६२ में चीशोल्म अफसर ने
अपनी लेखनी प्रारम्भ किया!
यह एक विस्तृत लेख (जनरल ऑफ़
एसियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल) में
छपा था.
उसी लेख को संछिप्त में सन १८६८ के
रिपोर्ट (ऑन द लैंड रेवेनुएसेटेलमें ट ऑफ़
दी बिलासपुर डिस्ट्रिक्ट इन सेंटल
प्रोविंसेज) में प्रस्तुत किया!
उक्त रिपोर्ट में चीशोल्म ने अपने पूर्व
का आलेख का हवाला दिया! जो सन
१८६८ के पृष्ट क्रमाक ४५ के पैराग्राफ
९७ में दर्ज है.
इसके बाद हीवेट १८६९ ,
क्रोडोक १८६९,
ग्रांट १८७०,
सेरिंग १८७२,
इब्नेल्सन १८८१,
नेस्फिस्ट १८८५,
बोश १८९०,
महाचार्य १८९५,
गॉर्डन १९०२,
वाल्टोन १९०३,
वास्टन रंगाचारी १९०९,
नेल्सन १९०९-१०,
रोज १९११,
रिजले १९१५,
रसेल हीरालाल १९१६,
बिग्स १९२०,
ऐलवान १९४६.
उपरोक्त सभी इतिहास कारो ने
बाबा गुरु घासीदास जी व
सतनामी समाज के सम्बन्ध में लेख लिखे
जो छत्तीसगढ़ के भूमि पर संघर्ष
तथा संस्कृति झलकता है!"
Tuesday, January 31, 2017
गुरु घासीदास इन गजेटियर
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