Sunday, January 29, 2017

आओ जाने बाबा साहब के संविधान से पहले क्या थे

*आओ जाने और समझे बाबा साहब के संघर्ष*
*और*
*उनके द्वारा लिखे गये संविधान से पहले*
*हमारे बाप दादा और हमारी पीढियां कहाँ, कैसे
और किन हालातों में रहते थे*
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*1 हम लोग कच्चे घरों में, तम्बूओं में,
झोपडियो में अमीरों की हदों
से हट कर गांव से बाहर तालाब किनारे रहते थे।
*2 धर्म प्रथा, जाति प्रथा,
सति प्रथा,
छूत प्रथा, रीति रिवाज,
संस्कृति,
परंपराओं और अमीरों के अपने ही बनाए गए कायदे
कानून के तहत हम गुलाम थे
*3 अच्छा खाना, अच्छा पहनना, बडे लोगों की
बराबरी करना, अपने हक के
लिए लडना, और पढाई करने का हमें कोई भी हक
नहीं था।
4 : हमारे वैद्य ( डाक्टर ),धर्म गुरु और हमारी पंचायतें
भी अलग होती थी।
*5 अमीर - गरीब, छोटे - बडे, ऊंच - नीच , और
जातिवाद की दीवारें होती
थी।
*6 हम औरों के टुकडों पर पलने वाले थे।
*7 हमारा अपना कुछ भी वजूद नहीं था।
*8 समाज में हमारा आदर,मान , सम्मान,इज्जत,
नाम और पहचान कुछ भी नहीं था।
*9 हमें मनहूस समझा जाता था।
*10 हमारी औरतों से मनचाही मनमानी
और बदसलूकीया की जाती
थी।
*11 हमें गुलाम बना कर खरीदा और बेचा जाता
था।
*12 हमें हदों और पाबंदियों में रखा जाता था।
*13 जाति और धर्म के नाम पर हमें आपस में ही
लडाया जाता था।
*14 हमारे पास किसी भी प्रकार का कोई भी
अधिकार नहीं था।
*15 कुछ भी करने से पहले हमें इजाजत लेनी
होती थी।
*16 ऊंची आवाज में बोलना, आंखें उठाना, और
ऊंचा सिर उठाना हमारे लिये
वर्जित था , पाप था।
*17 हमारी एकता के संगठनों को विद्रोही
बताकर दण्डित किया जाता था।
*18 अपने मतलब के लिए हमें मोहरा बनाया
जाता था।
*19 हम कमजोर, लाचार, असहाय,अनपढ,
गरीब , बे-घर और बे- सहारा थे।
*20 हमें दलिदरों में गिना जाता था।
*21 कोई भी हम से दोस्ती या रिश्तेदारी
बनाना पसंद नहीं करता था।
*22 हमें नीच और तुच्छ समझा जाता था।
*23 हमें बड़े लोगों की गंदगी साफ करने के लिए
इस्तेमाल किया जाता था।
*24 बिना वजह हमें दोषी करार देकर सजायें दी
जाती थी।
*25 कठपुतलियों की तरह हमें नचाया जाता
था।
*26 अत्याचार, अन्याय, शोषण और जुल्म सहना
हमारी आदत थी।
*27 हमारी कहीं भी कोई सुनवाई नहीं होती
थी।
*28 हम दर-ब-दर भटकने के लिए मजबूर थे।
*29 मौत और नरक से भी बदतर थी हमारी
जिन्दगियां , हमारे घर और हमारे परिवार ।
*30 जहां जीवन में आशा की कोई भी किरण
नहीं थी।
*31:* जहाँ हम गुलामी का
जीवन जीते थे।
*32 हमें गले में हांडी और पीछे झाड़ू बांधकर
चलना होता था ताकि हम जमीन पर न थूकें और
हमारे पैरों के अछूत निशान जमीन पर न बचें ।
*33 हम दोपहर के अलावा अपने दड़बों से बाहर
नहीं निकल सकते थे ।ताकि हमारी परछाई किसी
सवर्ण के ऊपर न पड़े ।
*34 दोपहर में बर्तन बजाते हुए ही घरों से बाहर
निकल सकते थे ।
*35 हमारा कृषि करना और आखेट करने पर
पाबन्दी थी ।केवल मुर्दा मवेशी का ही मांस खा
सकते थे ।
*36 हम नया कपड़ा नहीं पहन सकते थे।
*37 हम मानव द्वारा प्रयोग किए जाने वाले
तालाब से पानी नहीं पी सकते थे ।पी लेने पर
जिह्वा काट देने या मृत्यु दण्ड दिया जाता था ।
*38 हमारे पूर्वज जानवरों के तालाब से ही
पानी पी सकते थे।
*38 यदि हम किसी से छू जाते अथवा दिखाई दे
जाते तो दंडित किया जाता था।और वह सवर्ण गौ
मूत्र से नहाता था।
*39 हमें जानवरों से भी बदतर समझा जाता था।
*40 जब बारिश नहीं होती थी तो *तथाकथित
इन्द्र देवता* को प्रसन्न करने के लिए जगह जगह हमारे
पूर्वजों की *बलि* दी जाती थी।
*42 हमारे पूर्वजों की पहली सन्तान को पैदा
होते ही गंगा नदी में फेंक कर बहा देना होता था ।
*43 :* हमारे परिवार की बेटियों को मन्दिर को
दान में देना पड़ता था जो *देव दासी* कहलाती
थी ।उनसे पैदा अवैध सन्तान को *हरिजन* कहते है।
*44 :* कोई ब्रिज अथवा भवन बनाते समय चरक
प्रथा के नाम पर हमारे पूर्वजों की बलि देकर नींव में
दफन किया जाता था।
*45 :* हमारी माता बहनों को ऊपरी अंग ढकने पर
पाबन्दी थी ।
*46 :* ब्राह्मणी रियासत *त्रावणकोर* में यह
प्रथा अंग्रेज़ी शासनकाल में भी समाप्त करने के लिए
तैयार नहीं थे।जिसके लिए जद्दोजहद करना पड़ा।
*47 :* अच्छूत कहकर महामारी में भी हमारा इलाज
नहीं हो पाने के कारण , तड़प - तड़पकर मरते थे हम
लोग ।
*48 :* दो रोटी और कपड़ा के लिए कोल्हू के बैल
की तरह काम लिया जाता था हमारे पूर्वजों से।
*49 :*यह सब पाबंदी के नियम हमारे ऊपर यूरेशियन
ब्राह्मणों के उन पूर्वजों ने लगा रखे थे *जिन्हें आज
हम देवी देवता मानकर पूजते हैं*
*50 :*आज भी ब्राह्मण *जन्म कुण्डली* में हमें
*राक्षस , दानव ,दाना ,दैत्य या असुर*ही लिखता
है ।
और स्वयं को *" श्रेष्ठ"* मानते हुए *देव या देवता*
लिखता है ।
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*51 : अपने पूर्वजों की दुर्गति जानकर भी आप इन्हें
अपना देवी - देवता मानकर पूजना पसंद करते हैं ,इसे
क्या कहें , अज्ञानता या ............?*
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ऐसा था हमारे बाप दादाओं का
बीता हुआ
कल...
लेकिन आज जो परिवर्तन हुआ है
वह बाबा
साहब के कारण हुआ है ।
यही है *"अम्बेडकरवाद" !*
बाबा साहब के विचारों से
अंजान और
समाज से दूरी बनाए रखने वाले
लोगों पर,
ऊपर लिखी हुई बातें आज भी
लागू है वो
भी सिर्फ ब्राहमणों द्वारा
रचित
जाति-प्रथा के कारण ।
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फैसला अब आपके हाथों में है कि
आप बाबा साहब ,गौतम बुद्ध जी ,गुरु
रविदास जी , गुरु कबीर दास जी के
विचारों को
अपनाना चाहते है।
या फिर! इन विदेशियों के बनाए
हुये धर्म के
कीचड़ मे अपना और अपने बच्चों
का भविष्य
आज भी लपेटना चाहते है।
*=※===※===※====※===※=*
*: ए भारत के गरीबों,*
*दलितों व शोषितों ...!*
*- तुम्हारी मुक्ति का मार्ग*
*धर्मशास्त्र व मंदिर नही है*
*बल्कि तुम्हारा उद्धार उच्च शिक्षा* *व्यवसायी
बनाने वाले*
*रोजगार तथा उच्च आचरण व*
*नैतिकता में निहित है |*
*- तीर्थयात्रा, व्रत, पूजा-पाठ व*
*कर्मकांडों में कीमती समय बर्बाद मत करों |*
*- धर्मग्रंथों का अखण्ड पाठ करने,*
*यज्ञों में आहुति देने व मन्दिरों में*
*माथा टेकने से तुम्हारी दासता दूर नही होगी,*
*तुम्हारे गले में पड़ी तुलसी की माला*
*गरीबी से मुक्ति नही दिलाएगी |*
*काल्पनिक देवी-देवताओं की मूर्तियों के आगे नाक
रगड़ने से*
*तुम्हारी भुखमरी, दरिद्रता व गुलामी दूर नही
होगी |*
*- अपने पुरखों की तरह तुम भी चिथड़े मत लपेटो,*
*दड़बे जैसे घरों में मत रहो और इलाज के अभाव में
तड़फ-तड़फ कर जान मत गंवाओ |*
*- भाग्य व ईश्वर के भरोसे मत रहो,*
*तुम्हें अपना उद्धार खुद ही करना है |*
*- धर्म मनुष्य के लिए है* *मनुष्य धर्म के लिए नही
और जो धर्म तुम्हें इन्सान नही समझता वह धर्म नहीं
अधर्म का बोझ है |*
*जहाँ ऊँच और नीच की व्यवस्था है ,वह धर्म नही,*
*गुलाम बनाये रखने की साजिश है |*

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